…क्योंकि वो भी कभी बेटी थी!

…क्योंकि वो भी कभी बेटी थी!

“ममा, मेरे को एक ट्रिप पे जाना है, आपकी परमिशन तो है?” “हां-हां ठीक है, लेकिन… ” “…लेकिन क्या ममा कोई प्रॉब्लम है? तो नहीं जाते हैं!” “अरे वो बड़ी वाली दीदी तुमसे मिलने आ रही हैं.” “ठीक है ममा नहीं जाती हूं. इसमें क्या है! बाद में चले जाएंगे.” “थैंक्यू बेटा!” “क्या ममा! आप भी! आखिर मौसी मिलने तो मुझसे ही आ रही हैं ना.” [शाम को. डोर बेल बजती है. गेस्ट अंदर आते हैं. महिला कुछ घबराई हुई सी उसके रूम में जाती हैं.] “वो तुम्हें जाना था न. तुम निकल जाओ. नाहक ही मैंने तुम्हें रोक लिया....

जरूरत है, जरूरत है – सख्त जरूरत है मिसेज क्लीन की!

जरूरत है, जरूरत है – सख्त जरूरत है मिसेज क्लीन की!

घरवालों ने अपनी तरफ से भरोसा दिलाने की कोशिश की – “चलो ठीक है, मान कर चलो कि लड़की बिलकुल गोरी ही होगी.” सुनते ही वो ऐसे रिएक्ट किया कि सभी एक दूसरे का मुंह देखते रह गये. लोग बिलकुल गोरी चिट्टी लड़की तलाश रहे थे, लेकिन उसकी तो पसंद कुछ और ही निकली. “ये किसने कहा कि लड़की गोरी ही होनी चाहिये?” “फिर!” सभी एक साथ चौंक पड़े थे.

पेट और दिमाग का रिश्ता अच्छा होना चाहिये

पेट और दिमाग का रिश्ता अच्छा होना चाहिये

सिर्फ फायदा देखकर ही खाना थोड़े ही खाते हैं,' दादी ने रीता से कहा, 'खाना सिर्फ पेट के लिए नहीं, दिमाग के लिए भी खाया जाता है. हेल्दी खाने से पेट ठीक रहता है और टेस्टी से दिमाग. बस इतना ध्यान रहे - अच्छी सेहत के लिए पेट और दिमाग दोनों का आपस में रिश्ता ठीक होना चाहिये.

गुना – एक लव स्टोरी

गुना – एक लव स्टोरी

“बोल उदेश, सच में ये क्या तमाशा है? ये किस धोखे और बदले की बात कर रही है?” अब तक जो सवाल गुना उदेश से पूछ रही थी, वही सवाल तनुश का भी है. गुना को लगता है कि तनुश की बात मान कर उसने बहुत अच्छा किया. ऐसे वाकये कम ही होते हैं जब तमाशा और मर्यादा एक दूसरे को कॉम्प्लिमेंट देते नजर आयें. तनुश को उदेश शांत रहने का इशारा करता है और उसके बाद समझाने का प्रयास करता है. “भैया, प्लीज. पहले मेरी बात ध्यान से सुनो.”