जरूरत है, जरूरत है – सख्त जरूरत है मिसेज क्लीन की!

जरूरत है, जरूरत है – सख्त जरूरत है मिसेज क्लीन की!

वो शादी के लिए तैयार तो हो गया, पर एक शर्त भी रख दी – “लड़की साफ सुथरी होनी चाहिये.”

घरवालों को तो बस बेटे के हां करने की देर थी. एक गोरी लड़की की तलाश शुरू हो गयी.

जल्दी ही कई लड़कियों के फोटो भी आ गये. दिखाने की कोशिश हुई तो उसने साफ मना कर दिया.

“मुझे तो बस साफ सुथरी से मतलब है, बाकी आप लोग देख लीजिए जो देखना समझना हो.”

घरवालों ने अपनी तरफ से भरोसा दिलाने की कोशिश की – “चलो ठीक है, मान कर चलो कि लड़की बिलकुल गोरी ही होगी.”

इतना सुनते ही वो ऐसे रिएक्ट किया कि सभी एक दूसरे का मुंह देखते रह गये. लोग बिलकुल गोरी चिट्टी लड़की तलाश रहे थे, लेकिन उसकी तो पसंद कुछ और ही निकली.

“ये किसने कहा कि लड़की गोरी ही होनी चाहिये?”

“फिर!” सभी एक साथ चौंक पड़े थे.

“मैं साफ सुथरी लड़की की बात कर रहा हूं – और आप लोग हैं कि बस गोरी चमड़ी पर फोकस हो गये… हद है!”

“साफ सुथरी का मतलब गोरी ही तो हुई… फिर साफ सुथरी का क्या मतलब हुआ?”

“क्या मतलब? मतलब क्या? गोरे और सांवले से क्या फर्क पड़ता है?”

“क्या बात कर रहे हो चाचू?” चिंटू टपक पड़ा, “बोलो-बोलो…”

फिर उसने साफ सुथरी से मतलब सरल शब्दों में समझाया, “साफ सुथरे से मेरा बस इतना मतलब है कि उसे भी मेरी तरह साफ सफाई पसंद हो. बस.”

अब तो कोई मुश्किल ही नहीं थी. जान पहचान के ही एक परिवार में रिश्ता पक्का हो गया. कुछ दिन बाद शादी भी हो गयी. साफ सुथरी दुल्हन भी घर आ गयी.

मगर, साफ सुथरे होने कि मुश्किल का अंत नहीं हुआ था. नयी मुश्किल ये थी कि साफ सुथरे होने की अपनी अपनी परिभाषा थी – और अपना अपना तरीका भी. बहू के भी साफ सुथरे कुछ सपने थे.

डिनर पर डिस्कशन का टॉपिक उस दिन ‘साफ सुथरा होना’ ही था. कोई भी मौका को चिंटू से चुप रहा ही नहीं जाता. चिंटू जब बहुत छोटा था तभी से ननिहाल आ गया था. जब स्कूल में एडमिशन की बात आयी तो जिद पर अड़ गया नानी के यहां ही रहेंगे और यहीं पढ़ेंगे.

“बताओ मामी… मामू की साफ सुथरी पसंद तो हम समझ गये… अब आप भी बताओ…” चिंटू ने पूछा.

बहू को तो जैसे इसी सवाल का इंतजार था, “मुझे तो शादी से पहले ही शर्त सुना दी गयी. शादी के बाद की मेरी शर्त तो किसी ने सुनाई नहीं.”

सभी लोग बहू की ओर मुखातिब थे. पसोपेश ये भी कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गयी. वैसे अब कयास लगाने से कोई फायदा तो था नहीं.

“साफ सुथरी दुल्हन तो चाहिये – कभी ये सोचा कि बहू को भी साफ सुथरे लोग और साफ सुथरा घर चाहिये कि नहीं?”

आखिर में, देश की तरह घर में भी स्वच्छता अभियान लागू करने को लेकर आम राय से एक प्रस्ताव पारित हुआ – और सब लोग अपने अपने कमरे की ओर बढ़ गये.
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